| 000 | 01718nam a22002537a 4500 | ||
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| 020 | _a978-9377704582 | ||
| 041 | _aeng | ||
| 082 | _a126 MAA-K | ||
| 100 |
_aMAAsterG, _993160 |
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| 245 | _aKahaan se aaye hain... kahaan jaana hai? : कहाँ से आए हैं... कहाँ जाना है? | ||
| 260 |
_aNew Delhi; _bMotilal Banarsidass Publishing House, _c2026. |
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| 300 | _ax, 136p ; 19cm. | ||
| 500 | _aप्रथम संस्करण: दिल्ली, 2026. | ||
| 520 | _aयह पुस्तक जीवन में व्याप्त उदासी, खालीपन, प्रेम, संबंधों, सुख और शांति से जुड़े प्रश्नों पर आध्यात्मिक दृष्टि प्रस्तुत करती है। लेखक पाठक को आत्मज्ञान, परमात्मा, प्रेम और आंतरिक आनंद की ओर ले जाने वाले विचार प्रस्तुत करते हैं। पुस्तक का उद्देश्य जीवन की भाग-दौड़ और कठिनाइयों के बीच व्यक्ति को भीतर की शांति, आनंद और आध्यात्मिक समझ की ओर प्रेरित करना है। | ||
| 650 |
_aSelf (Philosophy). _993213 |
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| 650 |
_aSelf-knowledge. _993214 |
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| 650 |
_aSpiritual life. _993215 |
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| 650 |
_aHappiness. _993216 |
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| 942 | _cBK | ||
| 999 |
_c200955 _d200955 |
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